मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 - 15:01
नेमत का सच्चा आभार यह है कि उन्हें अल्लाह की आज्ञा के पालन में इस्तेमाल किया जाए: हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अंसारियान

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैन अंसारियान ने कहा है कि अल्लाह की नेमतों का वास्तविक आभार केवल ज़बान से ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहने में नहीं, बल्कि उन नेमतों को अल्लाह की आज्ञा के पालन, नेक कामों और दूसरों की सेवा में इस्तेमाल करने में है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन हुसैन अंसारियान ने अय्यामे फ़ातिमिया के दौरान मातमगाह हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा में तकरीर करते हुए हज़रत ज़ैनब कुबरा सलामुल्लाह अलैहा और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के ज्ञान संबंधी स्थान पर प्रकाश डाला।

उन्होंने इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें आपने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा को ऐसी विदुषी बताया है, जिन्होंने किसी से औपचारिक रूप से शिक्षा प्राप्त नहीं की थी। साथ ही, उन्हें ऐसी बुद्धिमान और गहरी समझ रखने वाली हस्ती बताया, जिन्हें किसी ने शिक्षा नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि ये शब्द हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा के उच्च ज्ञान संबंधी स्थान को दर्शाते हैं और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के ज्ञान तथा मारफ़त की महानता को समझने में भी मदद करते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन अंसारियान ने कहा कि धार्मिक शिक्षाओं के अनुसार, पैगंबरों अलैहिमुस्सलाम, इमामों अलैहिमुस्सलाम और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा का ज्ञान अल्लाह की विशेष कृपा से जुड़ा हुआ है। अहले बैत अलैहिमुस्सलाम के ज्ञान और आध्यात्मिक स्थान का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी श्रेष्ठता को केवल सामान्य मानवीय मापदंडों के आधार पर नहीं आंका जा सकता।

उन्होंने आगे कहा कि अल्लाह की नेमतें केवल धन-दौलत और भौतिक सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बुद्धि, स्वास्थ्य, ईमान, मार्गदर्शन, परिवार तथा पैगंबर-ए-अकरम सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही वसल्लम और अहले बैत अलैहिमुस्सलाम की मारफ़त भी बड़ी नेमतें हैं। पवित्र कुरआन के अनुसार, यदि मनुष्य अल्लाह की नेमतों को गिनना चाहे, तो वह उन्हें गिन नहीं सकता।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वास्तविक आभार कर्मों से प्रकट होता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी बुद्धि का इस्तेमाल सत्य को पहचानने के बजाय गलत कामों में, आंखों का इस्तेमाल पाप करने में, कानों का इस्तेमाल ग़ीबत और आरोप-प्रत्यारोप सुनने में तथा ज़बान का इस्तेमाल दूसरों का अपमान करने में करता है, तो वह इन नेमतों का सही आभार व्यक्त नहीं करता।

उन्होंने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी सभी क्षमताओं और संसाधनों का इस्तेमाल अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने, नेक काम करने और दूसरों की सेवा के लिए करे। यही नेमतों का वास्तविक आभार है।

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